मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश में जूनियर डाक्टरों की हड़ताल खत्म, हाईकोर्ट में कल 8 जून को होना थी सुनवाई

एक सप्ताह से ड्यूटी पर नहीं गए थे जूनियर डाक्टर्स

जूनियर डॉक्टरों के हड़ताल की बीमारी को “ठीक-ठाक” किया हाईकोर्ट की सख्ती ने. .

एक हफ्ते से आंदोलन कर रहे थे डॉक्टर्स,
आज जूनियर डॉक्टरों ने आंदोलन लिया वापस,
एसोसिएशन ने कहा- हमारी मांगें जायज थीं,ब्लैकमेलिंग नहीं कर रहे थे।

भोपाल , एमपी मीडिया पॉइंट

मध्यप्रदेश में अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर गए करीब तीन हजार जूनियर डॉक्टर फिर से काम पर लौट आए। यह सभी डॉक्टर अपनी कोविड ड्यूटी छोड़कर पिछले सोमवार को हड़ताल पर चले गए थे। उक्त हड़ताल पर हाई कोर्ट सख्त हो गया था और हड़ताल को अवैध करार दिया गया था। साथ ही हाई कोर्ट ने 24 घंटे के अंदर हड़ताल को खत्म करने के लिए कहा था।

जबलपुर हाईकोर्ट के आदेश को मानने के बजाय करीब 3 हजार जूनियर डॉक्टर्स ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया था। जिसे हाईकोर्ट ने अपने आदेश की अवमानना मानी थी और मंगलवार यानि 8 जून को इस मसले पर सुनवाई होनी थी । मगर इससे पहले ही जूनियर डॉक्टर ने अपनी हड़ताल वापस ले ली।

हाई कोर्ट ने हड़ताल को अवैध ठहराया था

गौरतलब है कि जबलपुर हाई कोर्ट के द्वारा जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल को अवैध करार देने और 5 मेडिकल कॉलेजों के जूनियर डॉक्टरों को बर्खास्त करने के बाद जूनियर डॉक्टर आर-पार की लड़ाई के मूड में आ गए थे. मध्य प्रदेश के करीब 3 हज़ार जूनियर डॉक्टरों ने अपना सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया था.

जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन ने कहा था कि हमारी हड़ताल खत्म करवाने के लिए घर पर पुलिस भेजी जा रही है. सरकार बोल रही है कि जूनियर डॉक्टर ब्लैकमेल कर रहे हैं, जबकि ऐसा नहीं है, अगर ब्लैकमेल करना होता तो तब करते जब मरीज़ ज्यादा थे, अब तो मरीज़ भी कम हैं तो ब्लैकमेल क्यों करेंगे।

जूनियर डॉक्टर्स की यह थी मांग

– स्टाइपेंड में 24% बढ़ोत्तरी करके 55000 से बढ़ाकर 68200 एवं 57000 से बढ़ाकर 70680 एवं 59000 से बढ़ाकर 73160 कर दी जाए.

– हर साल वार्षिक 6% की बढ़ोत्तरी भी हमारे बेसिक स्टाइपेंड पर दी जाए, इसके अलावा भी अन्य शामिल मांगें थीं।

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