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गोंडा (यूपी) हादसे के बाद….रसोई गैस सिलेंडर: सावधानी,समझदारी में ही सुरक्षा है…

सुरक्षा के लिए जरुर है संकेतों को समझना..

रसोई गैस सिलेंडर: सावधानी,समझदारी में ही सुरक्षा है…

डेस्क रिपोर्ट , एमपी मीडिया पॉइंट

रसोई गैस सिलेंडर (एलपीजी सिलेंडर) भारत के छोटे-छोटे और कच्चे घरों तक भी तेजी से पहुंच रहा है. रसोई गैस न सिर्फ गृहणियों के लिए सुविधाजनक है बल्कि हमारे वातावरण के लिए भी काफी फायदेमंद है. जहां एक तरफ रसोई गैस हमारी कई मुसीबतों को खत्म कर चुका है तो वहीं दूसरी ओर इसके खतरनाक नतीजों की खबरें भी लगातार सामने आती रहती हैं. रसोई गैस सिलेंडर को बहुत सावधानी से इस्तेमाल करना चाहिए. गैस सिलेंडर के बेहतर इस्तेमाल के लिए हमें कई अहम बातों का ध्यान रखना चाहिए. लोगों की लापरवाही की वजह से ही रसोई गैस सिलेंडर से जुड़े ज्यादातर हादसे होते हैं. गैस सिलेंडर में होने वाले विस्फोट में घर के साथ-साथ कीमती सामान तो बर्बाद होते ही हैं साथ ही कई लोगों की जान भी चली जाती है. हादसे का ताजा मामला उत्तरप्रदेश के गोंडा से निकलकर आया है जहां जान-माल का काफी नुकसान हुआ।

इसी सिलसिले में आज हम आपको रसोई गैस सिलेंडर पर लिखे जाने वाले एक ऐसे कोड के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आपके साथ-साथ आपके परिवार की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है.

सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं रसोई गैस सिलेंडर

रसोई गैस सिलेंडर पर लिखे जाने वाले कोड के बारे में जानने से पहले ये जानना बहुत जरूरी है कि आपके घरों में आने वाले सिलेंडर को कई तरह के टेस्ट से गुजरना होता है, जिसके बाद ही उन्हें इस्तेमाल के लिए भेजा जाता है. घरों में इस्तेमाल होने वाले एलपीजी गैस सिलेंडर BIS 3196 मानक को ध्यान में रखकर बनाया जाता है. आमतौर पर किसी भी एलपीजी गैस सिलेंडर की लाइफ 15 साल की होती है. अपनी सर्विस के दौरान सिलेंडरों को दो बार और टेस्ट के लिए भेजा जाता है. इस तरह एक सिलेंडर का कई बार टेस्ट हो जाता है. इस्तेमाल के लिए भेजे जाने से पहले तो इनका टेस्ट होता ही है, सर्विस के दौरान भी इनका दो बार टेस्ट होता है. सर्विस के दौरान सिलेंडर का पहला टेस्ट 10 साल के बाद होता है. इसके 5 साल बाद इनका दोबारा टेस्ट किया जाता है.

सामान्य प्रेशर के मुकाबले 5 गुना ज्यादा प्रेशर से होती है सिलेंडर की जांच

टेस्टिंग के वक्त सिलेंडर की लीकेज जांचने के लिए पानी से भरकर हाइड्रो टेस्ट किया जाता है. इसके अलावा इसका प्रेशर टेस्ट भी किया जाता है. इस दौरान एक सिलेंडर पर सामान्य प्रेशर के मुकाबले 5 गुना ज्यादा प्रेशर डाला जाता है. टेस्टिंग के दौरान मानकों पर खरे न उतरने वाले सिलेंडरों को नष्ट कर दिया जाता है.

सिलेंडर पर लिखे जाते हैं विशेष कोड

गैस सिलेंडर को आसानी से उठाने के लिए वॉल्व के पास 2-3 इंच चौड़ी पट्टी लगाई जाती है, जिसके ऊपर हैंडल जोड़ा जाता है. सिलेंडर पर लगाए गई पट्टियों पर ही एक कोड लिखा जाता है, जिनकी शुरुआत A, B, C और D से होती है और फिर दो अंकों का एक नंबर लिखा रहता है. उदाहरण के लिए- A 24, B 25, C 26, D 22. यहां A, B, C और D का मतलब महीना है. A का इस्तेमाल जनवरी, फरवरी और मार्च के लिए किया जाता है. B का इस्तेमाल अप्रैल, मई और जून के लिए किया जाता है. C का इस्तेमाल जुलाई, अगस्त और सितंबर के लिए किया जाता है. D का इस्तेमाल अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर के लिए किया जाता है. इसके अलावा दो अंकों वाले नंबर वर्ष के आखिरी दो अंक होते हैं.

टेस्टिंग डेट की याद दिलाने के लिए लिखे जाते हैं ये कोड

यह नंबर देखने में तो बड़े साधारण से लगते हैं लेकिन इनकी अहमियत सीधे तौर पर आपके साथ-साथ आपके पूरे परिवार से जुड़ी है. दरअसल, ये कोड सिलेंडर की टेस्टिंग डेट का जिक्र करते हैं. मान लीजिए किसी सिलेंडर पर C 26 कोड लिखा है, इसका मतलब ये हुआ कि उस सिलेंडर को साल 2026 के जुलाई, अगस्त या सितंबर महीने में टेस्टिंग के लिए जाना है. सीधी भाषा में कहें तो आपके घर में मौजूद गैस सिलेंडर हमेशा आने वाले साल का होना चाहिए. यदि आपके घर में कोई ऐसा सिलेंडर है जिसकी टेस्टिंग डेट निकल चुकी है तो वह आपके लिए खतरनाक हो सकता है. हालांकि, ऐसा बहुत कम या यूं समझ लीजिए की न के बराबर होता है।

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