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हाँ कुछ ऐसी ही मैं और ऐसे ही भाव है मेरे अपनो के लिए सिंहनाद से सदा रहे ताव है मेरे

हाँ कुछ ऐसी ही मैं और ऐसे ही भाव है मेरे
अपनो के लिए सिंहनाद से सदा रहे ताव है मेरे

करूणा, ममता , प्रेम की देवी निश्चित एक समय तक रहती
अपनो पर हो जब तनिक अंधेरा दूर करने मे समय न लेती

करूणा की देवी तुम बन दुष्टों पर कभी दया न करना
पड़े पीड़ जो अपनो पर , करूणा का तुम रूप न धरना

हाँ तुम लक्ष्मी हो इस जग की तो लक्ष्य तुम्हारे सिमित होंगे
पर समय पड़े पर काली बनना कर्तव्य तुम्हारे असीमित होगे

एक समय में करूणा त्याग कर तुमको शस्त्र उठाने होंगे
जिस कारण तुम जन्मी जग में वो कर्तव्य निभाने होंगे

दया और करूणा की देवी सीमित इन भावों को रखना
करे वार जब कोई छुपकर उसपर कभी ये दया न करना

अपने शक्ति स्वयं पहचानो लक्ष्मी के संग काली को मानों
आये जो संकट कभी द्वारे अपने सही रूप को धारों

मणिकर्णिका पांचाल सूर्यवंशी
नई दिल्ली

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