साहित्य जगत

चुम्बन

चुम्बन की महिमा गज़ब, चुम्बन भाव अनेक।
चापलूस चूमे चरण,चूमे हस्त विवेक।।
अधर पुष्प के चूम कर,करता भँवरा नेह।
चूम तिरंगा वीर यहाँ, त्याग देत है देह।।

दोहा मुक्तक

वृंदावन है सतरंगी,छाया है उल्लास।
रंग प्रीत के कृष्ण को,खीचें राधे पास।
गाता यमुना तीर है ,झूमे गोपी ग्वाल,
स्वामी तीनो लोक के, रचा रहे हैं रास।।

शिव साधिका

शक्ति शिवा की साधिका, मोहित मन शिव देख।
लिए कल्पना शिवमयी, बाँचे फिरती रेख।।

भोले भण्डारी सहज, बसें धाम कैलाश।
पारो समझाने चले, कोउ भला क्या आस।।

गौरा फिर व्याकुल भई , करती जलाभिषेक।
शिवू कामना हिय लिए, चुनी राह यह नेक।।

बेलपत्र जल पुष्प सँग , जापैं आठों याम।
मिले यही औघड़ सदा, नही और कछु काम।।

नंदा व्रत से हो गए, भोलेनाथ प्रसन्न।
घोंट भंग देवी सती, होती कभी न खिन्न ।।

इन्दु,अमरोहा,उत्तर प्रदेश

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