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ग्वालियर की शासकीय जमीनों को अतिक्रमण से मुक्त कराने वाली जांच रिपोर्ट वल्लभ भवन में खा रही धूल

विजया पाठक, 

भोपाल। शिवराज सिंह चौहान की बतौर मुख्यमंत्री चौथी पारी को प्रदेश में एक वर्ष पूरा होने में अब मात्र एक दिन शेष है। बीते वर्ष कमलनाथ की 15 महीनों की सरकार को सत्ता से बेदखल कर शिवराज सिंह प्रदेश की सत्ता पर काबिज हुए। विपक्ष से सत्ता पर बैठी भाजपा सरकार को यह मौका दिलाने में मुख्य भूमिका राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की रही है। यह सब जानते है कि किस तरह से ज्योतिरादित्य सिंधिया को कमलनाथ सरकार ने अनदेखा किया था, जिसके बाद नाराज होकर सिंधिया ने यह कदम उठाया। खैर, दो दिन पूर्व ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के एक वर्ष पूरे होने के मौके पर मुख्यमंत्री निवास पर शाही भोज रखा। इसमें सिंधिया के अलावा सिंधिय़ा खेमे के तीन प्रमुख मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, डॉ. प्रभु राम चौधऱी और तुलसी सिलावट शामिल हुए। देखा जाए तो सिंधिया के साथ मुख्यमंत्री का यह शाही भोज राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। कई लोगों का कहना है कि एक तरफ जहां प्रदेश भर में भू-माफियाओं के खिलाफ शिवराज सिंह चौहान अभियान छेडे हुए है, वहीं प्रदेश के सबसे बड़ी भू-माफिया के साथ बैठकर शाही भोज का आनंद ले रहे है। आखिर शिवराज सरकार ग्वालियर में सिंधिया द्वारा अतिक्रमण की जा रही शासकीय जमीनों को छुडवाने के लिए कोई कदम क्यों नहीं उठा रही है। क्या शिवराज सरकार सिंधिया से इस कदर डरी हुई है कि उसके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लेना चाहती? जाहिर है कि ग्वालियर नगर निगम क्षेत्र में शासकीय जमीनों के हेराफेरी और अतिक्रमण को लेकर वर्ष 2005 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर एक सदस्यीय कमेटी का गठन हुआ था। उस समिति में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मनोज श्रीवास्तव जो तत्कालीन राजस्व मंडल ग्वालियर के सदस्य थे उन्हें इस पूरे मामले की जांच करने के आदेश दिए गए थे। जिसके बाद उन्होंने तीन महीनें के भीतर समस्त जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय में सौंप दी थी जिसमें सिंधिया ट्रस्ट द्वारा शासकीय जमीनों में अतिक्रमण किए जाने संबंधी बातों का उल्लेख किया गया है। लेकिन आज 15 साल बाद भी शिवराज सरकार ने उस रिपोर्ट पर कोई एक्शन नहीं लिया। या फिर यूं कहा जाए कि सिंधिया के काले कारनामों का पुल्लिंदा वल्लभ भवन की चार दीवारों के भीतर धूल खाता पड़ा हुआ है जिसकी अब तक किसी ने सुध लेना भी जरूरी नहीं समझा। सूत्रों की मानें तो जबसे सिंधिया ने भाजपा सरकार के साथ हाथ मिलाया है, तबसे ग्वालियर में शासकीय भूमियों को सिंधिया ट्रस्ट के नाम करवाने के लिए बड़ी जोड़-तोड़ करने में जुटे हुए है। इसका ताजा उदाहरण है देवस्थान ट्रस्ट की जमीन पर बनें मंदिर के पुजारी के परिवार को वहां से बेदखल कर देना। कुल मिलाकर प्रदेश की जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को इस दिशा में एक बार फिर विचार करना चाहिए ताकि आम जनता के साथ संपूर्ण न्याय हो और दोषियों पर कड़ी कार्यवाही की जाए।

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