साहित्य जगत

राधा का रूप धर

राधा का रूप धर
मौसम ने किया ऋंगार,
उपवन मे खिली कली
और खिला कचनार ।
प्रेम रूपी हवा बही
मौसम मे आई बहार
प्रेम भाव के मोती बरसे
हर प्रेमी के द्वार ।
प्रेम दिवानी राधा नाचे
मौसम गाए मल्हार
दसो दिशाओ मे गूंजी
श्याम की बंशी यार।
देख प्रीत का रंग अनोखा
नफरत गयी अलसाए
कृष्ण कन्हैया के आगे
कौन भला इतराए ।
गौर से देखो तो सखी
प्रेमी रूप मे कृष्ण खड़े
हर किसी के द्वार।

रत्ना बापुली लखनऊ

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